Logo
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निःस्पृहः ।
निर्ममो निरहंकारः स शान्तिमधिगच्छति ।।
अर्थ जो मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओें का त्याग करके स्पृहारहित, ममता रहित और अहंता रहित होकर आचरण करता है, वह शांति को प्राप्त होता है। व्याख्याजो साधक सम्पूर्ण कामनाओं ममता, अहंकार, धन को त्याग कर प्रभु का विचार करते हैं, वही पुरुष शांति को प्राप्त है और मृत्यु के बाद भी शांति को प्राप्त होंगे।
logo

अपने आप को गीता परमरहस्यम् की गहन शिक्षाओं में डुबो दें, यह एक कालातीत मार्गदर्शक है जो आत्म-खोज और आंतरिक विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।

Follow us on

अधिक जानकारी या निस्वार्थ योगदान के लिए आज ही संपर्क करे।

[email protected] [email protected]